Saturday, September 12

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज बिलासपुर के साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित सात दिवसीय स्वदेशी मेला का अवलोकन करने पहुंचे। इस अवसर पर स्वदेशी जागरण मंच परिवार, बिलासपुर द्वारा मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का भव्य स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री श्री साय ने भारत माता, भगवान बिरसा मुंडा और राष्ट्रऋषि श्री दत्तोपंत ठेंगड़ी के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। उन्होंने स्वदेशी स्टालों का अवलोकन किया और कारीगरों, स्व-सहायता समूहों एवं युवा उद्यमियों द्वारा निर्मित उत्पादों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान करते हैं, बल्कि प्रदेश की आर्थिक धुरी को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

स्वदेशी मेला में स्थानीय परंपराओं के संवर्धन, ग्रामीण-शहरी उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से 300 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। हस्तशिल्प, कोसा वस्त्र, ढोकरा एवं बेलमेटल कला, गृह सज्जा सामग्री, जैविक उत्पाद और पारंपरिक व्यंजनों से सजे स्टॉलों ने आगंतुकों का विशेष आकर्षण खींचा। मेले में प्रदर्शित हस्तनिर्मित उत्पादों की गुणवत्ता और विविधता लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

जनसमुदाय को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि “न्यायधानी बिलासपुर में स्वदेशी मेला सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी अस्मिता और आत्मसम्मान का उत्सव है।” उन्होंने स्वदेशी जागरण मंच के संस्थापक दत्तोपंत ठेंगड़ी को नमन करते हुए कहा कि मंच द्वारा स्वदेशी विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य निरंतर जारी है। उन्होंने कहा कि मंच के पदाधिकारी वर्षों से प्रदेश के विभिन्न शहरों में स्वदेशी मेलों का आयोजन करते आ रहे हैं। इस वर्ष पहली बार बस्तर में भी स्वदेशी मेला आयोजित हुआ, जिसमें गृहमंत्री श्री अमित शाह भी शामिल हुए।

उन्होंने कहा कि स्वदेशी की शक्ति को सबसे पहले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने पहचाना था। महात्मा गांधी जी ने चरखा चलाकर स्वराज और स्वदेशी को जनांदोलन बनाया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वदेशी एक विचार है, जो हमें हमारी जड़ों से जोड़ता है और राष्ट्र की आत्मा को मजबूती देता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने स्वदेशी आंदोलन को नई ऊर्जा दी। ‘लोकल फॉर वोकल’ के आह्वान ने देशभर में स्थानीय उत्पादों के प्रोत्साहन को गति प्रदान की। आत्मनिर्भर भारत अभियान ने स्वदेशी निर्माण और उद्यमिता को मजबूती दी। ‘मेक इन इंडिया’ और कौशल विकास अभियान ने लाखों युवाओं के लिए नए अवसर पैदा किए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि “यदि हम विदेशी वस्तुएं खरीदेंगे तो हमारा पैसा विदेश जाएगा, इसलिए स्वदेशी अपनाना राष्ट्रहित में अत्यंत आवश्यक है।” उन्होंने व्यापारियों से भी आग्रह किया कि वे अपनी दुकानों में स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता से प्रदर्शित एवं विक्रय करें, ताकि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो और विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता कम हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ का कोसा, ढोकरा आर्ट और बस्तर का बेलमेटल आज वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। हमारे स्व-सहायता समूहों की बहनें उच्च गुणवत्ता के उत्पाद तैयार कर रही हैं, जिनकी मांग स्थानीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्थानीय उत्पादों के विपणन के लिए यूनिटी मॉल का निर्माण किया जा रहा है, जहाँ कारीगरों और उद्यमियों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री का बड़ा मंच मिलेगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वदेशी केवल आर्थिक सोच नहीं, बल्कि भारत की सुरक्षा, एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और आत्मनिर्भरता की आधारशिला है। वैश्वीकरण की प्रतिस्पर्धा के दौर में भी स्वदेशी उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है और विदेशी बाजारों में भी छत्तीसगढ़ के उत्पाद अपनी छाप छोड़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण, प्रोत्साहन और संसाधन उपलब्ध कराकर उन्हें राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा—“आइए, हम सब मिलकर हर घर स्वदेशी–हर हाथ स्वदेशी का संकल्प लें। यही आत्मनिर्भर भारत, मजबूत छत्तीसगढ़ और समृद्ध समाज का पथ है।” मुख्यमंत्री ने स्वदेशी जागरण मंच, उद्यमियों, स्व-सहायता समूहों, कुटीर उद्योगों और उपभोक्ताओं को स्वदेशी आंदोलन को मजबूत करने तथा मेले को सफल बनाने के लिए बधाई और धन्यवाद दिया।

मुख्यमंत्री ने स्वदेशी मेला में प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना अंतर्गत 04 हितग्राहियों को प्रथम ऋण राशि वितरित की।

केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने स्वदेशी जागरण मंच को कार्यक्रम की दिव्यता और निरंतरता के लिए हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि पिछले 15 वर्षों में इस आयोजन ने वास्तविक रूप से एक विशाल मेले का स्वरूप ग्रहण कर लिया है, जो स्वदेशी विचारधारा की जनस्वीकृति को दर्शाता है। केंद्रीय राज्य मंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए आत्मनिर्भर भारत के मंत्र को देश की नई दिशा बताया। उन्होंने कहा कि “अब हमें केवल आर्थिक आज़ादी ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आज़ादी की ओर भी आगे बढ़ना है। आत्मनिर्भर भारत का मूल मंत्र यही है कि हम स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग बढ़ाएं, स्थानीय उत्पादों को सम्मान दें और अपनी जड़ों से जुड़े रहें।”

विधायक श्री धरमलाल कौशिक ने कहा कि भारत की आजादी की लड़ाई में स्वदेशी आंदोलन ने निर्णायक भूमिका निभाई। उन्होंने महात्मा गांधी के पहले स्वदेशी अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि “गांधी जी जब दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे, तब विदेशी कपड़ों की पहली बार सार्वजनिक होली जलाकर यह संदेश दिया कि देश को आत्मनिर्भर बनने के लिए स्वदेशी अपनाना आवश्यक है।”

विधायक श्री अमर अग्रवाल ने कहा कि स्वदेशी जागरण मंच द्वारा वर्ष 1991 में प्रारंभ की गई पहल आज देश के आत्मनिर्भर भारत अभियान की आधारशिला बन चुकी है। उन्होंने कहा कि उस समय स्वदेशी का संदेश एक आंदोलन था, आज यह राष्ट्र के आर्थिक स्वाभिमान का मूल मंत्र बन गया है। विधायक अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य तभी संभव है जब देश के नागरिक भारत में निर्मित उत्पादों के उपयोग को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं।

कार्यक्रम के समापन में अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया। स्वागत समिति के अध्यक्ष श्री प्रवीण झा ने स्वागत भाषण दिया। वहीं श्री सुब्रत चाकी ने स्वदेशी मेला का प्रस्तावना प्रस्तुत किया।

Share.

Javed Khan
Editor

Address:
18C, Street 5, Sector 4, Bhilai Nagar,
Dist. Durg, Chhattisgarh – 490001

Mobile: +91-8319473093
Email: samvidhaantimes@gmail.com

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930  

© 2025 Samvidaan Times. Designed by Nimble Technology.

Exit mobile version