Wednesday, September 2

देशभर के वैद्यों ने साझा किए औषधीय अनुभव, पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के संरक्षण और संवर्धन पर हुई चर्चा

पारंपरिक वनौषधीय चिकित्सा और लोकज्ञान के संरक्षण को समर्पित दो दिवसीय राष्ट्रीय परंपरा वनौषधी ज्ञान संगोष्ठी-2026 का आयोजन 15 और 16 जुलाई को उतई में किया गया। संगोष्ठी में देश के विभिन्न राज्यों से आए परंपरागत वैद्यों एवं विशेषज्ञों ने भाग लेकर वनौषधियों के उपयोग, संरक्षण और ज्ञान के आदान-प्रदान पर विस्तार से चर्चा की।

उतई (दुर्ग)। दो दिवसीय राष्ट्रीय परंपरा वनौषधी ज्ञान संगोष्ठी-2026 का सफल आयोजन 15 एवं 16 जुलाई को उतई में किया गया। संगोष्ठी का उद्देश्य पारंपरिक वनौषधीय ज्ञान को संरक्षित करना, नई पीढ़ी तक पहुंचाना तथा देशभर के परंपरागत वैद्यों के अनुभवों का साझा मंच उपलब्ध कराना रहा।

संगोष्ठी में विभिन्न राज्यों से पहुंचे परंपरागत वैद्यों और विशेषज्ञों ने वनौषधियों के महत्व, उनके वैज्ञानिक उपयोग तथा लोक चिकित्सा की समृद्ध परंपराओं पर अपने अनुभव साझा किए। प्रतिभागियों ने वनौषधीय ज्ञान के संरक्षण, संवर्धन और शोध को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय परंपरा महासंघ के महासचिव राजेन्द्र डिकांटे, दुर्ग सांसद विजय बघेल तथा छत्तीसगढ़ पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम विशेष रूप से उपस्थित रहे। अतिथियों ने भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति और वनौषधीय विरासत को सुरक्षित रखने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। महासमुंद से डॉ. डमरू लाल डडसेना, डॉ. रेखा जोशी तथा नगर पंचायत की श्रीमती सरस्वती साहू ने भी संगोष्ठी में सहभागिता करते हुए अपने विचार रखे।

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Javed Khan
Editor

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