दिल्ली में हुए कार ब्लास्ट के पीछे की साजिश की परतें अब खुलने लगी हैं। जांच में सामने आया है कि इस धमाके की तैयारी जनवरी से की जा रही थी। फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी से सक्रिय लेडी टेररिस्ट डॉ. शाहीन शाहिद पिछले दो साल से विस्फोटक सामग्री जुटा रही थी। इसी मॉड्यूल ने देशभर में 200 बम लगाकर 26/11 जैसे हमलों की योजना बनाई थी।
दिल्ली (ए)। दिल्ली धमाका मामले में जांच एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। सूत्रों के अनुसार, धमाका करने वाले आतंकियों का नेटवर्क फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी से संचालित हो रहा था। गिरफ्तार डॉ. शाहीन शाहिद ने पूछताछ में खुलासा किया कि वह पिछले दो वर्षों से विस्फोटक जमा कर रही थी।
यह ग्रुप एक “व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल” के रूप में काम कर रहा था, जिसमें पेशेवर डॉक्टरों और शिक्षित युवाओं को शामिल किया गया था। यह मॉड्यूल जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद जैसे आतंकी संगठनों से जुड़ा बताया जा रहा है।
फरीदाबाद से मिली आतंकियों की दूसरी कार- धमाके के बाद जांच में पता चला कि आतंकियों के पास एक नहीं बल्कि दो कारें थीं। इनमें से लाल रंग की फोर्ड इकोस्पोर्ट (DL10-CK-0458) कार की तलाश के लिए दिल्ली, यूपी और हरियाणा में अलर्ट जारी किया गया था।
बुधवार शाम को यह कार हरियाणा के खंदावली गांव के पास खड़ी मिली। वाहन डॉ. उमर उन नबी के नाम पर रजिस्टर्ड है।
प्रधानमंत्री मोदी ने घायलों से की मुलाकात- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार दोपहर भूटान यात्रा से लौटने के बाद सीधे LNJP अस्पताल पहुंचे। उन्होंने धमाके में घायल मरीजों से मुलाकात की और डॉक्टरों से उनके उपचार की जानकारी ली।
पीएम ने कहा कि “इस हमले की साजिश रचने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।”
वे लगभग आधा घंटा अस्पताल में रुके और मरीजों से धमाके के वक्त की स्थिति जानी।
देशभर में धमाकों की थी बड़ी साजिश- जांच एजेंसियों के अनुसार, आतंकियों की योजना थी कि देशभर में 200 IED धमाके किए जाएं। उनका निशाना लाल किला, इंडिया गेट, कॉन्स्टिट्यूशन क्लब और गौरी शंकर मंदिर जैसे प्रमुख स्थान थे।
साथ ही गुरुग्राम, फरीदाबाद, देश के बड़े रेलवे स्टेशन और मॉल्स भी आतंकियों के निशाने पर थे। एजेंसियों का मानना है कि यह गिरोह धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश में था।
इसके लिए उन्होंने कश्मीर के पुलवामा, शोपियां और अनंतनाग के डॉक्टरों को शामिल किया था, ताकि वे पहचान छिपाकर देशभर में आसानी से घूम सकें।
