Wednesday, September 2

एलन मस्क की कंपनी करेगी सैटेलाइट इंटरनेट का ट्रायल, हर कोने तक मिलेगी तेज कनेक्टिविटी; अब गांवों में भी पहुंचेगा हाई-स्पीड नेटवर्क

भारत अब सैटेलाइट के जरिये इंटरनेट की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। एलन मस्क की कंपनी “स्टारलिंक” 30 और 31 अक्टूबर को मुंबई में अपने सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस का लाइव डेमो करने जा रही है। यह डेमो भारत में इस हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड सेवा की लॉन्चिंग से पहले का महत्वपूर्ण रेगुलेटरी चरण माना जा रहा है।

मुंबई में दो दिन का डेमो रन, सुरक्षा एजेंसियां रहेंगी अलर्ट

न्यूज़ एजेंसी PTI के मुताबिक, स्टारलिंक को इस डेमो के लिए प्रोविजनल स्पेक्ट्रम अलॉट किया गया है। कंपनी इस दौरान सैटेलाइट से इंटरनेट कनेक्टिविटी, डेटा ट्रांसफर, लेटेंसी और सिक्योरिटी स्टैंडर्ड्स का परीक्षण करेगी।
डेमो के समय लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियां और सिक्योरिटी डिपार्टमेंट्स भी मॉनिटरिंग में रहेंगे, ताकि डेटा एन्क्रिप्शन और यूज़र प्राइवेसी जैसे पहलू जांचे जा सकें।

भारत में शुरू होगा ‘सैटेलाइट इंटरनेट’ का नया दौर

अगर यह ट्रायल सफल रहता है, तो भारत में इंटरनेट सेवाओं का चेहरा बदल सकता है। अभी देश में ज्यादातर इंटरनेट कनेक्टिविटी फाइबर या मोबाइल नेटवर्क पर निर्भर है, लेकिन स्टारलिंक सीधे सैटेलाइट से इंटरनेट पहुंचाएगा — यानी जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंच पाता, वहां भी तेज इंटरनेट मिलेगा।
यह सेवा विशेष रूप से गांवों, पहाड़ी इलाकों और सीमावर्ती क्षेत्रों में राहत लाएगी।

मुंबई में ऑफिस, 5 साल की लीज पर तैयारियां पूरी

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, स्टारलिंक ने मुंबई के चांदिवली स्थित ‘बूमरैंग’ कॉमर्शियल बिल्डिंग में 1,294 वर्ग फीट जगह किराए पर ली है।
यह लीज 14 अक्टूबर से शुरू होकर 5 साल तक चलेगी। कंपनी हर महीने ₹3.52 लाख किराया देगी और हर साल इसमें 5% की वृद्धि होगी।
इसके साथ ही कंपनी ने ₹31.7 लाख का सिक्योरिटी डिपॉजिट भी जमा किया है। यानी स्टारलिंक का बिजनेस इंफ्रास्ट्रक्चर अब पूरी तरह तैयार है, बस अंतिम सरकारी मंजूरी बाकी है।

स्टारलिंक के आने से घट सकते हैं इंटरनेट के दाम

भारत का सैटेलाइट ब्रॉडबैंड मार्केट अभी शुरुआती दौर में है। जियो, एयरटेल और टाटा जैसी कंपनियां भी इसमें उतरने की तैयारी में हैं।
हालांकि, स्टारलिंक की टेक्नोलॉजी ग्लोबल लेवल की है और इसके आने से मार्केट में कॉम्पिटिशन बढ़ेगा, जिससे इंटरनेट की स्पीड और क्वालिटी में सुधार होगा और कीमतें कम हो सकती हैं।

क्या है स्टारलिंक, और कैसे काम करता है यह सिस्टम?

स्टारलिंक दरअसल, स्पेसएक्स का ग्लोबल प्रोजेक्ट है, जो हजारों सैटेलाइट्स के नेटवर्क के जरिए धरती पर इंटरनेट सिग्नल भेजता है।
ये सैटेलाइट्स पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में घूमते हैं, जिससे नेटवर्क लेटेंसी बेहद कम रहती है और यूज़र को हाई-स्पीड, स्टेबल इंटरनेट मिलता है।
यह टेक्नोलॉजी खासतौर पर उन इलाकों में उपयोगी है, जहां फाइबर या मोबाइल नेटवर्क की पहुंच नहीं है — जैसे गांव, जंगल या पहाड़ी क्षेत्र।

भारत के डिजिटल भविष्य की नई उड़ान

विशेषज्ञों का मानना है कि स्टारलिंक के आने से भारत में डिजिटल डिवाइड कम होगा। जहां अब तक इंटरनेट नहीं था, वहां भी लोग अब ऑनलाइन एजुकेशन, ई-हेल्थ और डिजिटल सर्विसेज का लाभ उठा सकेंगे।
अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो भारत 2026 तक पूरी तरह सैटेलाइट इंटरनेट युग में प्रवेश कर सकता है।

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Javed Khan
Editor

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