Monday, March 23

बस्तर IG सुंदरराज पी बोले— “सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर माओवादी लौट रहे मुख्यधारा में”; महाराष्ट्र में 6 करोड़ के इनामी भूपति ने भी 61 साथियों के साथ किया सरेंडर

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सल संगठन को लगातार झटके लग रहे हैं। पिछले 20 महीनों में 1,876 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं। ताज़ा घटनाओं में कांकेर जिले में 100 माओवादियों, जबकि सुकमा में 27 नक्सलियों ने हथियार डाल दिए हैं। इनमें कई टॉप कमांडर और इनामी नक्सली शामिल हैं। सभी को सुरक्षा घेरे में लेकर BSF कैंप तक बस से लाया गया।

कांकेर/सुकमा। उत्तर बस्तर के कांकेर जिले में गुरुवार को नक्सल संगठन को बड़ा झटका लगा, जब लगभग 100 नक्सलियों ने कामतेड़ा BSF कैंप में आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें संगठन के टॉप लीडर राजू सलाम, कमांडर प्रसाद और मीना जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।

सूत्रों के अनुसार, राजू सलाम डिवीजनल कमेटी मेंबर (DVCM) और कंपनी नंबर-5 का कमांडर था, जो रावघाट क्षेत्र में पिछले 20 सालों से सक्रिय रहा है और कई बड़ी नक्सली घटनाओं में शामिल रहा है। सुरक्षा कारणों से कैंप में हाई अलर्ट जारी किया गया है। पुलिस आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया में जुटी हुई है। संभावना है कि जल्द ही इन्हें जिला या संभागीय मुख्यालय में मीडिया के सामने पेश किया जाएगा।

सुकमा में 27 नक्सलियों ने डाले हथियार:

सुकमा जिले में 14 अक्टूबर को 27 माओवादियों ने SP किरण चव्हाण और केंद्रीय बलों के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण किया। इनमें 10 महिलाएं और 17 पुरुष शामिल हैं।
इन सभी पर कुल 50 लाख रुपए का इनाम था — जिसमें एक नक्सली पर 10 लाख, तीन पर 8-8 लाख और अन्य पर 1-3 लाख तक का इनाम घोषित था। सभी आत्मसमर्पित माओवादी PLGA बटालियन नंबर 01 और रिजनल मिलिट्री कंपनी से जुड़े हुए थे। उन्होंने कहा कि वे सरकार की “छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025” और “नियद नेल्ला नार” योजना से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौटे हैं। राज्य सरकार ने इन्हें 50-50 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि और पुनर्वास सुविधाएं देने की घोषणा की है।

बस्तर IG का बयान:

बस्तर IG सुंदरराज पी ने बताया, “पिछले 20 महीनों में 1,876 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं। यह सरकार की पुनर्वास नीति और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने की इच्छा का परिणाम है। हमें विश्वास है कि आने वाले समय में और भी माओवादी इस सकारात्मक रास्ते को अपनाएंगे।”

महाराष्ट्र में भी बड़ा सरेंडर:

इससे एक दिन पहले महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में 6 करोड़ के इनामी और पोलित ब्यूरो सदस्य मोजुल्ला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति उर्फ सोनू दादा ने अपने 61 साथियों के साथ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने आत्मसमर्पण किया था। भूपति पिछले चार दशकों से नक्सल संगठन से जुड़ा हुआ था और छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश व ओडिशा सहित कई राज्यों में मोस्ट वांटेड था। छत्तीसगढ़ सरकार ने उस पर 1.5 करोड़ रुपए, जबकि अन्य राज्यों ने मिलाकर 6 करोड़ रुपए से अधिक का इनाम घोषित किया था। सुरक्षा एजेंसियों के लगातार दबाव और संगठन की घटती पकड़ के चलते उसने हथियार डालने का निर्णय लिया। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की पुनर्वास नीतियों और सुरक्षाबलों की निरंतर कार्रवाई ने नक्सल संगठन की जड़ें कमजोर कर दी हैं। पिछले दो वर्षों में आत्मसमर्पण करने वाले अधिकांश नक्सली अब रोज़गार, शिक्षा और सामाजिक योजनाओं से जुड़ चुके हैं।

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Javed Khan
Editor

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