तीन दिन तक नवजात के सिरहाने टंगा रहा चार्ट, अस्पताल प्रशासन पर कार्रवाई की तैयारी — हाईकोर्ट ने कहा, यह अमानवीय और निजता का उल्लंघन
रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में मानव संवेदनाओं को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। नवजात शिशु के पास मेडिकल स्टाफ ने लाल अक्षरों में ‘HIV POSITIVE MOTHER’ लिखकर बड़ा चार्ट टांग दिया। यह टैग तीन दिन तक वहीं लटकता रहा। जब बच्चे के पिता ने इसे देखा, तो उनकी आंखों से आंसू बह निकले। मामले के सामने आने पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया और अब पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है।
रायपुर। डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा) में 6 अक्टूबर को एक एचआईवी संक्रमित महिला ने बच्चे को जन्म दिया। जन्म के बाद बच्चे को सामान्य प्रक्रिया के तहत PICU में शिफ्ट किया गया, लेकिन इसके बाद मेडिकल स्टाफ ने जो किया, उसने पूरे अस्पताल प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए।
स्टाफ ने सफेद चार्ट पेपर लाकर उस पर लाल रंग के बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा — “HIV POSITIVE MOTHER”। यह चार्ट बच्चे के पास इस तरह चिपकाया गया कि दूर से गुजरने वाले लोग भी पढ़ सकें। यह टैग तीन दिन तक वहीं लटका रहा, जिससे महिला और उसके परिजन मानसिक रूप से टूट गए।
पीड़िता ने अपने पति से यह बात कही। पति को PICU में सीधे प्रवेश की अनुमति नहीं थी, लेकिन एक क्षणिक झलक में जब उन्होंने बच्चे के पास लगा यह चार्ट देखा, तो वे फूट पड़े। उन्होंने बताया, “हम खुद इस बीमारी से जूझ रहे हैं। समाज तो दूर, अस्पताल का स्टाफ भी हमसे दूरी बनाने लगा था। सबसे बड़ा दुख इस बात का है कि गलती तीन दिनों तक नजरअंदाज की गई।”
शिकायत के बाद जैसे ही यह मामला अधिकारियों तक पहुंचा, चार्ट हटा दिया गया। मीडिया में खबर आने के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस घटना पर स्वत: संज्ञान लिया और इसे “अमानवीय और नैतिकता का उल्लंघन” बताया।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की खंडपीठ ने कहा —
“यह कृत्य न केवल अमानवीय है बल्कि निजता के अधिकार का घोर उल्लंघन भी है।”
अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव से व्यक्तिगत शपथपत्र मांगा है और निर्देश दिया है कि दोषियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाए। इस बीच, पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है और अस्पताल प्रशासन को नोटिस जारी कर संबंधित डॉक्टरों और स्टाफ के नाम मांगे हैं। हालांकि, मेकाहारा प्रशासन का कहना है कि उन्हें अभी तक कोई आधिकारिक नोटिस नहीं मिला है और विभागीय जांच जारी है। यह घटना स्वास्थ्य तंत्र की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करती है — जहां मरीज की बीमारी से अधिक, उसकी पहचान उजागर होना पीड़ा का कारण बन गया।
