नेहरू आर्ट गैलरी में कला और प्रकृति का संगम, वन्यजीव संरक्षण एवं सामाजिक जागरूकता के लिए कलाकारों को प्रमाण पत्र से नवाज़ा गया
नेहरू आर्ट गैलरी में 18-20 सितंबर आयोजित एकल फोटोग्राफी प्रदर्शनी “भावनाओं के रंग-पटनायक के संग” का भव्य समापन किया गया। इस अवसर पर प्रसिद्ध फोटोग्राफर वीरेन्द्र पटनायक को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। प्रदर्शनी के दौरान कलाकारों को प्रमाण पत्र प्रदान कर उनके प्रयासों की सराहना की गई, जबकि वन्य जीव संरक्षण और जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश भी साझा किया गया।
भिलाई। कला, संवेदनशीलता और सामाजिक एकता को अपनी फोटोग्राफी के माध्यम से प्रस्तुत करने वाले फोटोग्राफर वीरेन्द्र पटनायक की प्रदर्शनी “भावनाओं के रंग” ने नेहरू आर्ट गैलरी में तीन दिन तक कला प्रेमियों और बौद्धिक वर्ग का ध्यान आकर्षित किया। प्रदर्शनी में पटनायक ने सामाजिक भावनाओं, स्त्री शक्ति, वात्सल्य और कौमी एकता की झलक पेश की।
वन्यजीव संरक्षण सप्ताह के अंतर्गत आयोजित समूह छायाचित्र प्रदर्शनी 6-8 अक्टूबर तक चली। इस दौरान राष्ट्रीय फोटोग्राफर अनूप नायक, डॉ. हिमांशु गुप्ता और दानेश सिन्हा ने वन्यजीवों और पक्षियों पर आधारित उत्कृष्ट छायाचित्र प्रस्तुत किए।
समापन अवसर पर मुख्य महाप्रबंधक (परियोजनाएँ) श्री मानस गुप्ता ने दीप प्रज्वलन कर प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और आगंतुक पुस्तिका में लिखा कि यह प्रदर्शनी न केवल फोटोग्राफी के उत्कृष्ट कला कौशल का परिचायक है, बल्कि प्रकृति एवं जैव विविधता के संरक्षण की जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
एक अभिनव पहल के तहत बाल कलाकार मास्टर स्पंदन सेनगुप्ता ने अपनी की-बोर्ड प्रस्तुति से कार्यक्रम को जीवंत बना दिया। सम्मान समारोह में महाप्रबंधक (प्रशासन एवं जनसम्पर्क) श्री अमूल्य प्रियदर्शी ने कलाकारों को प्रमाण पत्र प्रदान किया। उपस्थित रहे वरिष्ठ अधिकारी, कलाकार, फोटोग्राफी प्रेमी और आम नागरिक इस प्रदर्शनी की सफलता के साक्षी बने।
विशिष्ट अतिथि डीएफओ दुर्ग संभाग दीपेश कपिल (आईएफएस) ने प्रदर्शनी की सराहना करते हुए इसे छत्तीसगढ़ में कला और प्रकृति संरक्षण के क्षेत्र में मील का पत्थर बताया।
प्रदर्शनी में शामिल फोटोग्राफरों की पृष्ठभूमि भी उल्लेखनीय रही — अनूप नायक का बचपन से ही प्रकृति और वन्यजीव फोटोग्राफी में गहरा रुझान है। डॉ. हिमांशु गुप्ता और दानेश सिन्हा ने भी अपने अनुभव और प्रशिक्षण के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण एवं अनुसंधान की महत्वपूर्ण झलक प्रस्तुत की।
