Tuesday, September 1

150 बेड फुल होने पर दो वार्डों में एक-एक बेड पर दो प्रसूताएं; रोज़ाना 24 डिलीवरी, हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका मान सुनवाई शुरू की

रायपुर में मेकाहारा अस्पताल की अव्यवस्था पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे “बेहद दुखद और अस्वीकार्य” करार दिया। एक ही बेड पर दो प्रसूताओं को रखने के मामले में कोर्ट ने कहा कि यह महिलाओं की गोपनीयता, सम्मान और स्वच्छता के अधिकार का उल्लंघन है। हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव से शपथपत्र सहित जवाब मांगा है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल (मेकाहारा) में एक ही बेड पर दो प्रसूताओं को लिटाने की घटना पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। 29 अक्टूबर को गायनी वार्ड में सभी 150 बेड फुल होने के कारण वार्ड 5 और 6 में प्रसूताओं को एक-एक बेड साझा करना पड़ा। नवजात शिशुओं के साथ महिलाएं बेड के आधे-आधे हिस्से में पड़ी थीं।

हाईकोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा कि प्रसूताओं की गोपनीयता, गरिमा और स्वच्छता की रक्षा अनिवार्य है। कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के ACS से शपथपत्र के साथ विस्तृत जवाब मांगा है। वहीं अस्पतालों में किट-रीजेंट की कमी को लेकर CG-MSC के एमडी को भी निर्देश दिए गए हैं।

हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने दैनिक भास्कर की खबर पर स्वतः संज्ञान लेकर इसे जनहित याचिका मान सुनवाई शुरू की। अदालत ने मामले में 6 नवंबर को अगली सुनवाई निर्धारित की है।

हर घंटे एक डिलीवरी, बेड क्षमता से अधिक भार

गायनी वार्ड की क्षमता 150 बेड की है, लेकिन प्रतिदिन औसतन 24 डिलीवरी (सिजेरियन+नॉर्मल) होने से अस्पताल में मरीजों का भार बढ़ जाता है। अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने कहा कि प्रदेशभर से मरीज रेफर होकर आ रहे हैं, किसी को मना नहीं किया जा सकता। स्थिति को देखते हुए अलग मातृ-शिशु अस्पताल तैयार किया जा रहा है।

अस्पताल में हंगामा भी

बेड की कमी से आक्रोशित परिजनों ने वार्ड में हंगामा भी किया। उन्हें बाद में शांत कराया गया। मेकाहारा में पहले भी अव्यवस्था, सर्जरी में देरी और परिजनों को अस्पताल परिसर में रात गुजारने जैसे मामले सामने आ चुके हैं।

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Javed Khan
Editor

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