Tuesday, March 31

नई दिल्ली(ए)। आज लोक आस्था का महापर्व छठ है। हिंदू धर्म में दिवाली के छठे दिन बाद लोक आस्था का महापर्व छठ मनाया जाता है। छठ महापर्व चार दिनों तक चलता है जिसमें पहले दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर समापन होता है। यह त्योहार भगवान सूर्य और माता छठी को समर्पित होता है। वैदिक पंचांग के अनुसार छठ महापर्व कार्तिक माह की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है, जिसमें अस्त होते और उदय होते सूर्य देवता को अर्घ्य देकर मनाया जाता है। इस बार छठ महापर्व 25 अक्तूबर को शुरू होकर 28 अक्तूबर तक चलेगा। 27 अक्तूबर को छठ महापर्व का तीसरा दिन है, जो बहुत ही खास होता है। इस दिन संध्या अर्घ्य देने का विशेष महत्व होता है। षष्ठी को डूबते सूर्य को अर्घ्य और उगते सूर्य सप्तमी को अर्घ्य देकर व्रत समाप्त होता है। इस चार दिवसीय त्योहार में सूर्य और छठी मैया की पूजा की जाती है। इस दिन व्रत करना बहुत कठिन माना जाता है क्योंकि इस व्रत को कठोर नियमों के अनुसार 36 घंटे तक रखा जाता है। यह त्योहार विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और बिहार समेत उत्तर भारत में बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह व्रत संतान के सुखी जीवन की कामना के लिए किया जाता है। छठ पर्व में मुख्य सूर्य देव को अर्घ्य देने का सबसे ज्यादा महत्व माना गया है। आइए जानते हैं छठ पूजा की अर्घ्य का समय और पारण समय क्या है।

संध्या अर्घ्य का समय
छठ पूजा पर सबसे महत्वपूर्ण दिन तीसरा यानी संध्या अर्घ्य माना जाता है। इस दिन संध्या अर्घ्य का होता है। इस दिन व्रती घाट पर आकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। वैंदिक पंचांग के अनुसार 27 अक्तूबर को सूर्योदय प्रातः 06:30 मिनट और सूर्यास्त शाम 05:40 मिनट पर होगा। इस दिन व्रती और भक्त किसी पवित्र नदी या तालाब मे कमर तक पानी में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।

उगते सूर्य को अर्घ्य देने का महत्व
छठ महापर्व का चौथा और आखिरी दिन कार्तिक माह की सप्तमी तिथि को होता है जिसमें इस दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण का होता है। 28 अक्तूबर 2025 को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इसके बाद ही 36 घंटे का व्रत समाप्त होता है। अर्घ्य देने के बाद व्रती प्रसाद का सेवन करके व्रत का पारण करती हैं।
छठ व्रत पूजा विधि
छठ पूजा के लिए दो बड़े बांस की टोकरी लें, जिन्हें पथिया और सूप के नाम से जाना जाता है।
इसके साथ ही डगरी, पोनिया, ढाकन, कलश, पुखार, सरवा भी जरूर रख लें।
बांस की टोकरी में भगवान सूर्य देव को अर्पित करने वाला भोग रखा जाता है। जिनमें ठेकुआ, मखान, अक्षत, भुसवा, सुपारी, अंकुरी, गन्ना आदि चीजें शामिल हैं।
इसके अलावा टोकरी में पांच प्रकार के फल जैसे शरीफा, नारियल, केला, नाशपाती और डाभ (बड़ा वाला नींबू) रखा जाता है।
इसके साथ ही टोकरी में पंचमेर यानी पांच रंग की मिठाई रखी जाती है। जिन टोकरी में आप छठ पूजा के लिए प्रसाद रखा रहे हैं उन पर सिंदूर और पिठार जरूर लगा लें।
छठ के पहले दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है जिसे संध्या अर्घ्य के नाम से जाना जाता है।
इस दिन भगवान सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए बांस या पीतल की टोकरी या सूप का उपयोग करना चाहिए।

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Javed Khan
Editor

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