साफ-सफाई, लाइटिंग और सुरक्षा की तैयारी पूरी; सेक्टर-2 तालाब बनेगा मुख्य आकर्षण, आज से नहाय-खाय के साथ शुरू होगा व्रत
भिलाई-दुर्ग में सूर्य उपासना का पावन पर्व छठ महापर्व इस बार पूरे भव्यता और आस्था के साथ मनाया जाएगा। चार दिन चलने वाला यह पर्व शुक्रवार से शुरू होकर सोमवार तक चलेगा। नगर निगम और प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए तालाबों पर विशेष तैयारियां की हैं।
भिलाई-दुर्ग। दुर्ग जिले में छठ महापर्व की तैयारियां चरम पर हैं। आस्था और अनुशासन का प्रतीक यह पर्व 25 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। पहले दिन नहाय-खाय से इसकी शुरुआत होगी और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ इसका समापन होगा।
भिलाई में इस बार 25 से अधिक तालाबों में श्रद्धालु छठ पूजा करेंगे, जबकि दुर्ग शहर में भी 10 से अधिक घाटों पर व्यवस्था की गई है। भिलाई का सेक्टर-2 तालाब हर वर्ष की तरह इस बार भी प्रमुख केंद्र रहेगा, जहां हजारों की संख्या में व्रती महिलाएं और श्रद्धालु सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करेंगे। इसके अलावा बैकुंठधाम, मरोदा डेम, शीतला तालाब, छावनी तालाब समेत कई स्थलों पर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
भक्तों ने तालाब किनारे अपनी-अपनी बेदियां सजा ली हैं। जिन श्रद्धालुओं ने अब तक बेदी नहीं बनाई, उन्होंने घाट पर अपने नाम और पते लिखकर जगह आरक्षित कर ली है। नगर निगमों ने घाटों पर साफ-सफाई, लाइटिंग, सुरक्षा और पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की है। छठ पर्व के दौरान फायर ब्रिगेड, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें तैनात रहेंगी। प्रशासन ने गोताखोरों, एंबुलेंस और प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों की व्यवस्था भी की है। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे पर्यावरण संरक्षण के लिए मिट्टी की बेदी बनाएं और सीमेंट का उपयोग न करें।
भिलाई-दुर्ग के बाजारों में छठ पूजा सामग्री की खरीददारी जोरों पर है। सूप, दौरा, ठेकुआ बनाने की सामग्री और सोलह शृंगार से सजे स्टॉलों पर भीड़ उमड़ रही है।
चार दिवसीय छठ महापर्व का कार्यक्रम:
पहला दिन – 25 अक्टूबर: नहाय-खाय
व्रती महिलाएं स्नान कर सात्विक भोजन करती हैं। लौकी-भात और चने की दाल का सेवन परंपरागत रूप से किया जाता है।
दूसरा दिन – 26 अक्टूबर: खरना
निर्जला उपवास के बाद शाम को गुड़ की खीर और गेहूं की रोटी का प्रसाद चढ़ाकर व्रत की शुरुआत की जाती है।
तीसरा दिन – 27 अक्टूबर: डूबते सूर्य को अर्घ्य
श्रद्धालु तालाबों में एकत्र होकर अस्त होते सूर्य को सूप में ठेकुआ, फल और प्रसाद अर्पित करते हैं।
चौथा दिन – 28 अक्टूबर: उगते सूर्य को अर्घ्य
प्रातःकाल उगते सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है और व्रत का समापन होता है।
