Tuesday, September 1

हर साल की तरह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या यानि दीपावाली का त्योहार देश भर में धूम धाम से मनाया जाएगा. दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का विशेष विधान है. इस दिन संध्या और रात्रि के समय शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी विघ्नहर्ता भगवान गणेश और माता सरस्वती की पूजा और आराधना की जाती है. पुराणों के अनुसार कार्तिक अमावस्या की अंधेरी रात में महालक्ष्मी स्वयं भूलोक पर आती हैं और हर घर में विचरण करती हैं…

नईदिल्ली (ए)। पंचांग के अनुसार, 20 अक्टूबर यानी आज दीपावली का पर्व मनाया जाएगा. हर साल यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को दिवाली का पर्व मनाया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान राम चौदह वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे, और अयोध्या वासियों ने उनका स्वागत दीप जलाकर किया था, इसी वजह से दीपावली का पर्व मनाया जाता है।

ऐसा भी माना जाता है कि दिवाली की रात मां लक्ष्मी धरती पर भ्रमण करती हैं और भक्तों को इच्छापूर्ति का आशीर्वाद देती हैं. तो चलिए अब जानते हैं कि इस बार दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजा का क्या मुहूर्त रहेगा।

त्रेता युग की दीपावली

त्रेता युग भगवान श्री राम के नाम से पहचान जाता है. प्रभु राम चौदह वर्षों का वनवास बिताकर और लंकापति रावण का वध करके जब अयोध्या वापस लौटे तो सारी नगरी सजा दी गई. जगह-जगह पर दीप जलाए गए. इस तरह त्रेता युग की पहली दिवाली मनाई गई. साथ ही ये पर्व अंधकार पर प्रकाश का प्रतीक बन गया।

द्वापर युग की दीपावली 
द्वापर युग में दीपोत्सव से एक दिन पहले रूप चौदस को भगवान श्री कृष्ण ने अत्याचारी नरकासुर का वध किया था. इसलिए इस दिन को नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है. नरकासुर के वध की खुशी में अगले दिन द्वारिका और मथुरा में लोगों ने दीप जलाकर उत्सव मनाया था।

पंचांग के अनुसार, इस बार कार्तिक अमावस्या तिथि की शुरुआत 20 अक्टूबर यानी आज दोपहर 3 बजकर 44 मिनट पर होगी और तिथि का समापन 21 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 55 मिनट पर होगा।

 

दिवाली की पूजा का शुभ मुहूर्त

आज दिवाली की पूजा के लिए 2 खास मुहूर्त प्राप्त होंगे. जिसमें पहला मुहूर्त प्रदोष काल है, इस दिन प्रदोष काल की शुरुआत शाम 5 बजकर 46 मिनट से होगी और इसका समापन रात 8 बजकर 18 मिनट पर होगा. इसके अलावा, स्थिर लग्न का वृषभ काल में भी मां लक्ष्मी के पूजन का अच्छा मुहूर्त माना जाता है जो कि शाम 7 बजकर 8 मिनट से शुरू होकर रात 9 बजकर 3 मिनट पर समाप्त होगा।

इन दोनों मुहूर्तों के अलावा, मां लक्ष्मी की पूजा का खास मुहूर्त शाम 7 बजकर 08 मिनट से शुरू होकर रात 8 बजकर 18 मिनट पर समाप्त हो जाएगा, जिसकी अवधि 1 घंटे 11 मिनट की रहेगी. इसके अलावा, इस दिन महानिशीथ काल मध्यरात्रि 11 बजकर 41 मिनट से शुरू होकर अर्धरात्रि 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।

दिवाली 2025 शुभ योग

दिवाली आज कई सारे शुभ योगों के बीच मनाई जाएगी. जिसमें हंस महापुरुष राजयोग का निर्माण हो रहा है क्योंकि इस दिन देवगुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क राशि में विराजमान होंगे. इसके अलावा, शनि मीन राशि में वक्री रहेंगे. साथ ही, शुक्र चंद्रमा की शुभ स्थिति से इस दिन वैभव लक्ष्मी राजयोग का निर्माण हो रहा है. वहीं, दिवाली के दिन तुला राशि में सूर्य-बुध की युति से बुधादित्य राजयोग का निर्माण होगा।

दिवाली पर पूजन सामग्री

दिवाली के दिन पूजा करने से पहले कुछ इकट्ठी कर लें जिसमें शामिल हैं रोली, कुमकुम, चंदन, अक्षत, लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति, पूजा की चौकी, लाल कपड़ा, पान, सुपारी, पंचामृत, रुई की बत्ती, नारियल, गंगाजल, फल, फूल, कलश, आम के पत्ते, मौली, जनेऊ, दूर्वा, कपूर, धूप, दीपक, खील, बताशे, मिठाई आदि।

दिवाली पर मां लक्ष्मी और गणेश जी का पूजन कैसे होगा

दिवाली की शाम सबसे पहले पूजा की चौकी पर नया कपड़ा बिछाएं. फिर, उसके ऊपर रोली से स्वास्तिक और नवग्रह बनाएं. उसके बाद वहां पर गणेश जी और लक्ष्मी जी की मूर्ति स्थापना करें. अखंड दीपक जलाएं. कलश की स्थापना करें. पूजा के समय मुख पूर्व या उत्तर दिशा में रखें. फिर, गंगा जल अपने ऊपर छिड़कें. माथे पर तिलक लगाएं. फिर, गणेश जी और मां लक्ष्मी को गंगाजल से स्नान कराएं. उसके बाद चंदन, अक्षत, पुष्प, पान, फल, खील, बताशे, मिठाई अर्पित करें. फिर, गणेश जी और मां लक्ष्मी के मंत्र पढ़ें. पूजा के अंत में मां लक्ष्मी की आरती करें।

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Javed Khan
Editor

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