Wednesday, September 2

धर्मांतरण और चंगाई सभाओं को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर अब छत्तीसगढ़ सरकार ने निर्णायक रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने ऐलान किया कि प्रदेश में जल्द ही ऐसा सख्त कानून लागू किया जाएगा, जो देश में धर्मांतरण पर नियंत्रण के मामले में सबसे प्रभावशाली होगा।

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में सोमवार को आयोजित कलेक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस में राज्य के भीतर बढ़ती धर्मांतरण गतिविधियों और चंगाई सभाओं पर गंभीर चर्चा हुई। बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सरकार प्रदेश में शांति और धार्मिक सौहार्द बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाने जा रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा — “धर्मांतरण के नाम पर भ्रम फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और चंगाई सभाओं पर रोक लगाई जाएगी।”

विजय शर्मा ने बताया कि धर्मांतरण विरोधी कानून का प्रारूप तैयार कर लिया गया है, जिसे आने वाले विधानसभा सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा। इस कानून में प्रलोभन, दबाव या झूठे वादों के जरिए धर्म परिवर्तन कराने वालों को जेल और जुर्माने दोनों की सजा होगी। उन्होंने कहा कि “यह विधेयक देश का सबसे मजबूत कानून साबित होगा।”

⚖️ क्या होगा नए कानून में:

छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से बनाए जा रहे धार्मिक स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि कोई भी व्यक्ति धर्म बदलने से 60 दिन पहले प्रशासन को सूचित करेगा। प्रशासनिक अनुमति और नियमों के पालन के बाद ही धर्म परिवर्तन वैध माना जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

🧾 कानून की तैयारी और ड्राफ्ट प्रक्रिया:

गृह मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि इस कानून के प्रारूप को तैयार करने के लिए सरकार ने ओडिशा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश सहित 9 राज्यों के अधिनियमों का गहन अध्ययन किया है। खुद शर्मा ने 52 बैठकों के बाद इस ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया। 5 पन्नों के इस ड्राफ्ट में 17 प्रमुख बिंदु शामिल हैं, जिनमें धर्म परिवर्तन में किसी भी तरह के प्रलोभन, दबाव या आर्थिक लाभ देने पर कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है।

📍 क्यों जरूरी हुआ यह कानून:

छत्तीसगढ़ के कई आदिवासी इलाकों — विशेष रूप से बस्तर, नारायणपुर, जशपुर और रायगढ़ — में पिछले कुछ वर्षों से बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन की घटनाएँ सामने आई हैं। कई बार ये विवाद सामुदायिक टकराव में भी बदल गए, जिससे स्थानीय शांति व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा।

सरकार का मानना है कि इन इलाकों में धर्म परिवर्तन के नाम पर सामाजिक विभाजन पैदा किया जा रहा है। ऐसे में धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक सद्भाव को बनाए रखने के लिए कानून बनाना अनिवार्य हो गया है।

🗣️ विजय शर्मा ने कहा – “राज्य में शांति सर्वोपरि”

डिप्टी सीएम शर्मा ने कहा — “छत्तीसगढ़ में किसी भी कीमत पर धार्मिक अशांति नहीं फैलने दी जाएगी। धर्मांतरण के नाम पर समाज में फूट डालने वालों पर कठोर कार्रवाई होगी। सरकार का उद्देश्य किसी के धार्मिक अधिकारों को सीमित करना नहीं, बल्कि शांति और स्थिरता बनाए रखना है।”

🔍 पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति:

पिछले कुछ महीनों में धर्मांतरण और चंगाई सभा को लेकर रायपुर, नारायणपुर और बस्तर जैसे इलाकों में कई बार तनाव की स्थिति बनी। प्रशासन को कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा। राज्य सरकार का मानना है कि इन विवादों की जड़ में संगठित रूप से चल रही धार्मिक गतिविधियाँ हैं, जिन पर नियंत्रण जरूरी है। सरकार ने संकेत दिया है कि यह विधेयक आगामी विधानसभा सत्र में प्रस्तुत कर पारित कराया जाएगा। इसके लागू होने के बाद छत्तीसगढ़ देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो जाएगा जहाँ धर्मांतरण पर नियंत्रण के लिए स्पष्ट और सख्त कानूनी ढांचा मौजूद होगा।

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Javed Khan
Editor

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